शरद पवार ने राहुल गांधी को दिखाया आईना, बोले 1962 में क्या हुआ, ये नहीं भूल सकते

NCP अध्यक्ष शरद पवार ने एक बार फिर कांग्रेस को आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने साफ कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1962 के युद्ध में चीन ने भारत की 45000 वर्ग किलोमीटर भूमि हड़प ली थी।

संवेदनशील मामलों पर नहीं होनी चाहिए राजनीति  

शरद पवार शनिवार को सतारा में मीडिया से बात कर रहे थे। उनसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें राहुल गांधी भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ पर प्रधानमंत्री के ‘सरेंडर’ कर देने की बात कह रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह पूरा मामला बहुत संवेदनशील है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

बता दें कि पवार ने कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री की सर्वदलीय वर्चुअल बैठक में भी कांग्रेस के रुख का विरोध करते हुए ऐसा ही वक्तव्य दिया था। नरसिम्हाराव सरकार में खुद रक्षामंत्री रह चुके शरद पवार ने आज कहा कि लद्दाख की गलवन घाटी में हुई घटना के लिए सीधे-सीधे रक्षामंत्री को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। क्योंकि वहां पेट्रोलिंग के दौरान भारतीय सैनिक सजग थे। पवार ने कहा कि गलवन घाटी में चीन ने ही उकसाने वाला काम किया है।

इस समय आरोप लगाना हमें सही नहीं लगता

प्रेस के लोगों को समझाते हुए पूर्व रक्षामंत्री ने कहा कि गलवन घाटी में भारत अपनी सीमा में एक सड़क का निर्माण कर रहा है। चीनी सैनिक उसी सड़क पर कब्जा करना चाहते थे, जिन्हें बलपूर्वक खदेड़ा गया। इसे किसी की असफलता नहीं कहा जाना चाहिए। यदि हमारे सैनिकों की पेट्रोलिंग के दौरान कोई हमारे क्षेत्र में किसी समय घुस आए, तो सीधे यह नहीं कहा जा सकता कि यह दिल्ली में बैठे रक्षामंत्री की गलती है। पेट्रोलिंग हो रही है। वो (चीनी) घुसे तो संघर्ष हुआ। इसका मतलब कि आप सजग थे। हमें पता भी नहीं चला कि चीनी कब आए, और कब खदेड़ दिए गए। इसलिए इस समय आरोप लगाना हमें सही नहीं लगता।

यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए’

पवार ने राहुल गांधी को आईना दिखाते हुए कहा कि 1962 के युद्ध में चीन द्वारा कब्जाई गई 45000 वर्ग किलोमीटर जमीन आज भी चीन के कब्जे में है। हमें नहीं पता कि अभी उन्होंने कुछ जमीन कब्जा की है, या नहीं। लेकिन आरोप लगाते समय हमें यह भी देखना चाहिए कि जब हम सत्ता में थे, तो क्या हुआ था। यदि इतना बड़ा भूखंड उस समय कब्जा किया गया, तो इसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

‘मैंने कभी नहीं देखा कि इस प्रकार रोज दाम बढ़ रहे हों’

हालांकि एक विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हुए शरद पवार ने केंद्र सरकार को जनहित से जुड़े अन्य मुद्दों पर घेरने की कोशिश भी की। इन दिनों रोज बढ़ रहे डीजल-पेट्रोल के दामों पर टिप्पणी करते हुए पवार ने कहा कि मैंने कभी नहीं देखा कि इस प्रकार रोज दाम बढ़ रहे हों। पवार ने कहा कि ईंधन के दाम इस प्रकार बढ़ना अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालेगा। लोग अभी इस पर कुछ बोल नहीं रहे हैं। जिसके कारण अलग हैं। लेकिन वो (केंद्र) इस परिस्थिति का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।

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