Mumbai: स्लम इलाकों की आधी आबादी संक्रमित होकर आपने आप हुई ठीक

Published Date: 29 Jul 2020 1:32 PM
Mumbai: स्लम इलाकों की आधी आबादी संक्रमित होकर आपने आप हुई ठीक

मुंबई में अब कोरोना की रफ़्तार धीमी हो गई है. मंगलवार को मुंबई में कोरोना संक्रमित के 717 नए मामले सामने आए है. पिछले दो महीनों के बाद मुंबई में पहेली बार कोरोना का केस इतना कम आया है. यहां कुल कोरोना संक्रिमत की संख्या 1,10,846 तक पहुंच गई है.

मुंबई (Mumbai) में किए गए सीरोलॉजिकल सर्वे में पता चला है कि मुंबई के स्लम (Slum) में रह रहे 57 फीसद लोग कोरोना संक्रमित होने के बाद आपने आप ठीक हो गए. वहीं नॉन-स्लम इलाकों में ऐसे लोगों की तदाद 16 फीसद है. इससे यह पता चलता है कि स्लम इलाकों में रह रही आधी से ज्यादा आबादी कोरोना से संक्रमित होकर ठीक भी हो गई और लोगों को इसका पता तक नहीं चला. यह सर्वे बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के तीन वार्डों में हुआ.

समाचार एजेंसी पीटीआइ के अनुसार यह सीरो सर्वे तीन जून को शुरू हुआ और जुलाई के पहले दो हफ्तों तक अनुमानित 8,870 में से 6,936 सैंपल इकट्ठा किए गए. ये तीन वार्ड आर-नॉर्थ (दहिसर), एम-वेस्ट (चेम्बूर) और एफ-नॉर्थ (माटुंगा) हैं. बीएमसी के अनुसार हर्ड इम्युनिटी के बारे में और जानकारी जुटाने के लिहाज से सर्वे के ये परिणाम काफी अहम हैं. इस सीरोलॉजिकल सर्वे को बीएमसी ने नीति आयोग और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के साथ मिलकर किया.

BMC एक और सर्वे करने की तैयारी में

न्यूज़ एजेंसी पीटीआइ के अनुसार बीएमसी (BMC) एक और सर्वे करने की तैयारी में है. इससे संक्रमण के फैलाव और हर्ड इम्युनिटी को लेकर अहम जानकारी सामने आएगी. हालांकि, अब तक ये साफ नहीं है कि हर्ड इम्युनिटी के लिए किस स्तर तक संक्रमण चाहिए. सर्वे में पता चला है कि कोरोना संक्रमण पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थोड़ा ज्यादा देखा गया. बीएमसी के अनुसार स्लम में संक्रमण का प्रसार ज्यादा रहने का कारण जनसंख्या घनत्व हो सकता है. यहां लोग पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं साझा करते हैं. इससे सोशल डिस्टेंसिंग का बेहतर ढंग से पालन करना मुश्किल हो जाता है.

बीएमसी के अनुसार नॉन-स्लम इलाकों (बिल्डिंग) में कोरोना संक्रमण का प्रसार कम होने का कारण शारीरिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) का बढ़िया तरीके से पालन करना और बेहतर साफ-सफाई की व्यवस्था. बीएमसी के अनुसार सर्वे से यह भी पता चला है कि इन्फेक्शन फैटेलिटी रेट (IFR) (0.05-0.10%) काफी कम है.

सीरो-सर्वे के से यह पता लगाया जाता है की किस अनुपात में आबादी कोरोना से संक्रमित हुई है. सीरो-सर्वे में किसी क्षेत्र में रहने वाले कई लोगों के खून के सैंपल टेस्ट किये जाते है. इससे लोगों के शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने वाले एंटीबॉडी की मौजूदगी के साथ ही यह पता चल जाता कि कौन व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित था और अब ठीक हो चुका है.