इतिहास में पहली बार ‘लालबाग चा राजा’ गणपति मंडल ने गणेशोत्सव नहीं मनाने का किया फैसला

लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते पंढरपुर की वारी यात्रा की तरह ही गणेशोत्सव भी फींका रहने वाला है। महामारी के कारण विश्व प्रसिद्ध ‘लालबाग च राजा'(लालबाग के राजा) गणपति मंडल ने इस बार गणेशोत्सव नहीं मनाने का फैसला किया है। 84 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब लालबाग के राजा की स्थापना नहीं होगी। सीएम ठाकरे ने भी इस बार सिर्फ 4 फीट के गणपति स्थापित करने का निर्देश गणेश मंडलों को दिया था। बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 1 लाख 75 हजार के करीब पहुंच गया है।

महाराष्ट्र के बढ़ते कोरोनावायरस (COVID-19) मामलों, मुंबई के लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल ने बुधवार (1 जुलाई) को 2020 में गणेशोत्सव आयोजित नहीं करने का फैसला किया। लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल ने घोषणा की है कि रक्त और प्लाज्मा दान शिविर की स्थापना की जाएगी. लालबाग च राजा को सेलेब्रिटी गणपति की संज्ञा भी दी जाती है। हर साल यहां लाखों की संख्या में भक्त और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज दर्शन के लिए आते हैं। हर साल अलग-अलग थीम पर बनने वाले गणपति आकर्षण का मुख्य केंद्र होते हैं।

लालबाग च राजा ( Lalbaughcha Raja) को सेलेब्रिटी गणपति की संज्ञा भी दी जाती है। हर साल यहां लाखों की संख्या में भक्त और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज दर्शन के लिए आते हैं। हर साल अलग-अलग थीम पर बनने वाले गणपति आकर्षण का मुख्य केंद्र होते हैं।

इसलिए लिया गया उत्सव रद्द करने का फैसला
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी मंडलों को आदेश दिया था कि इस साल गणपति उत्सव हर साल की तरह न मनाया जाए, क्योंकि इसमें बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि गणपति की मूर्ति की ऊंचाई 4 फीट तक ही रखी जाए। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि गणपति की लंबाई कम नहीं की जा सकती है। अगर छोटी मूर्ति भी लाई जाती है तो बप्पा के दर्शन के लिए बड़ी तादाद में लोग जमा होंगे। ऐसे में लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इस साल न ही कोई मूर्ति होगी, न ही मूर्ति विसर्जन किया जाएगा।

पिछले साल लालबाग के राजा का 51 करोड़ का बीमा कवर था 
साल 2019 में लालबाग के राजा का 51 कोरोड़ कवर का बीमा हुआ था। मुंबई में सबसे ज्यादा दान इन्हें मिलता है। साल 2018 में यहां 12 करोड़ रुपए दान में चढ़ाए गए थे। दान में मिली वस्तुओं की नीलामी से 1 करोड़ 58 लाख रु. मिले थे।

व्यापारियों ने बनाया पंडाल

एक जमाने में मुंबई के लाल बाग के व्यापारियों का कारोबार घाटे में चलता था। व्यापारी चाहते थे कि लाल बाग के एक खुली जगह पर भी बाजार लगे। कहते हैं इसी इच्छा के साथ कुछ व्यापारियों ने लाल बाग के राजा के पंडाल की स्थापना की थी। लाल बाग के राजा की मूर्ति स्थापित हो जाने के बाद व्यापारियों की मनोकामना पूरी होने में वक्त नहीं लगा। इसके बाद से ही यहां लाल बाग के राजा की स्थापना हर साल होने लगी। लाल बाग के गणपति का उत्सव साल दर साल और भव्य होता जा रहा है। सन् 1934 से हर वर्ष मुंबई के लाल बाग इलाके में लाल बाग के राजा की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाती है।

 

 

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