चीन(China)में जहा एक तरफ फिर कोरोना ने पैर पसारना शुरू कर दिया है तो वही दूसरी तरफ NCRB ने भारत में कोरोना काल के दौरान होने वाली मौतों के चौकाने वाले आकड़े सामने रखे है। NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक , कोरोना काल में यानी साल 2021 में भारत में एक लाख 64 हजार नागरिकों ने आत्महत्या की है. मनोचिकित्सकों के मुताबिक, पिछले दो सालों में डिप्रेशन की दर में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
चीन में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखकर भारत में भी स्वास्थ्य व्यवस्था सतर्क हो गई है. भारत में पिछले दो सालों से लगभग सभी क्षेत्रों पर कोरोना का प्रभाव पड़ा है, लेकिन आर्थिक संकट के कारण कई लोग आत्महत्या जैसे कदम उठा चुके है। एनसीआरबी की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं और कोरोना काल में भारत में साल 2021 में 1 लाख 64 हजार लोगों ने आत्महत्या की है. इसके पीछे आर्थिक तनाव, बीमारी, पारिवारिक विवाद कुछ कारण हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार कोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्षों में नागरिकों में अवसाद की दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बारे में सोचने पर मजबूर करने वाली बात यह है कि आत्महत्या करने वालों में 15 से 30 साल के लड़के-लड़कियों की संख्या ज्यादा है।
कोरोना काल में तनाव बढ़ा, बीमारी पर पैसा खर्च हुआ, आर्थिक स्थिति कमजोर हुई, कई लोगों की नौकरी चली गई और इससे नागरिकों में अवसाद पैदा हो गया। आत्महत्याओं की इस दर को रोकने के लिए सरकार को कुछ जरूरी कदम उठाने और जन जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। स्कूलों, कॉलेजों में युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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