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Amit Satam statement: अमित साटम के विवादित बयान ने मुंबई का राजनीतिक तापमान बढ़ाया

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Amit Satam statement: अमित साटम के विवादित बयान ने मुंबई

मुंबई में भाजपा नेता अमित साटम के कथित विवादित बयान ने शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्मा दिया है। भाजपा की ओर से बाळासाहेब ठाकरे की स्मृतिस्थली पर आयोजित कार्यक्रम में ‘दोन्ही ठाकरे यांना सुबुद्धी दे’ जैसी प्रार्थना के कुछ ही समय बाद, शिवसेना समर्थक नेता अखिल चित्रे ने इसपर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। (Amit Satam statement)

चित्रे ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया कि “मुंबई पुलिस की लाज को ठेस पहुंचाने वाले, उत्तर भारतीयों को जान से मारने की धमकी देने वाले, महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले ऐसे व्यक्ति को मुंबई भाजपा अध्यक्ष पद देना कितना उचित है?” उन्होंने आगे कहा कि “देवा, अब तू ही भाजपा को सुबुद्धी दे, नहीं तो मराठी संस्कार में पले-बढ़े मुंबईकर ही भाजपा को काबू में लाएंगे।”

इन आरोपों और पलटवारों के बाद मुंबई में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। दोनों ही राजनीतिक दलों के समर्थक सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सक्रिय हो गए हैं। शहर की सड़कों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है कि इस विवाद का आगे क्या परिणाम निकल सकता है। (Amit Satam statement)

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवाद अक्सर आगामी चुनावों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होते हैं। अमित साटम के बयान और उसके बाद शिवसेना द्वारा किए गए पलटवार ने राजनीतिक मैदान को और भी संवेदनशील बना दिया है। मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, और प्रशासन को भी सतर्क रहने के लिए मजबूर किया गया है।

भाजपा की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पार्टी के अंदर इस मुद्दे पर चर्चा और रणनीति बनाई जा रही है ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। वहीं, विपक्षी दल इसे भाजपा की छवि पर सवाल उठाने का अवसर मान रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई में यह विवाद न केवल शहर के राजनीतिक माहौल को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी चुनावों की तैयारियों पर भी असर डाल सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और ट्वीट्स ने युवा और आम जनता में भी गहरी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुंबई के नागरिक और राजनीतिक पर्यवेक्षक दोनों ही यह देख रहे हैं कि भाजपा और शिवसेना इस विवाद को कैसे संभालते हैं। विशेष रूप से यह भी देखने वाली बात होगी कि अमित साटम की ओर से किसी तरह की सफाई या प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि मुंबई की राजनीति हमेशा सक्रिय और संवेदनशील रहती है। छोटे-छोटे बयान भी बड़े राजनीतिक तूफान का कारण बन सकते हैं, और इस मामले में सभी राजनीतिक दल सावधानी बरतने के लिए बाध्य हैं। (Amit Satam statement)

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