चिल्ड्रन्स डे 2025 के अवसर पर मुंबई की 11 वर्षीय हridya Chavan ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने न केवल महाराष्ट्र के ट्रेकिंग प्रेमियों बल्कि पूरे देश के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। (Bhirvagad Children’s Day)
इतनी कम उम्र में कठिन और जोखिमपूर्ण भीरवगड किले (Bhairavgad Fort) की सफल चढ़ाई करना किसी भी अनुभवी पर्वतारोही के लिए भी चुनौतीपूर्ण है,
लेकिन हridya ने अपने पिता और उनकी टीम के साथ यह चैलेंज पूरा कर एक मिसाल कायम की। (Bhirvagad Children’s Day)
हridya, जो अब तक 55 किलों पर चढ़ाई कर चुकी हैं, बचपन से ही ट्रेकिंग के प्रति बेहद उत्साही रही हैं। पर्वतमालाओं और ऐतिहासिक किलों के प्रति उनका आकर्षण उन्हें बार-बार नई चुनौतियों की ओर खींचता है। उनके पिता अमित चव्हाण, जो स्वयं एक अनुभवी ट्रेकर हैं, हमेशा उन्हें सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ ट्रेकिंग की ट्रेनिंग देते रहे हैं। इस बार भी उनके साथ उनके पिता के मित्र अभिजीत पाटिल और संकेत वारलीकर मौजूद थे, जिन्होंने पूरे ट्रेक के दौरान हridya की सुरक्षा और मार्गदर्शन का विशेष ध्यान रखा। (Bhirvagad Children’s Day)
भैरवगड किला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुरबाद तालुका में मालशेज घाट के पास स्थित है। लगभग 2,830 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला अपने अत्यंत तीखे चढ़ाई मार्ग, संकरे पथ, और लगभग सीधी खड़ी चट्टानों के लिए प्रसिद्ध है। ट्रेकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, भीरवगड को महाराष्ट्र के सबसे कठिन ट्रेक्स में से एक माना जाता है, जहाँ जरा सी चूक भी खतरनाक साबित हो सकती है।
हridya ने यह ट्रेक पूरी तरह प्रोफेशनल सेफ्टी गियर—हार्नेस, हेलमेट, रोप क्लाइंबिंग सिस्टम और हुक्स—का उपयोग करते हुए पूरा किया। इस ट्रेक में कई ऐसे प्वाइंट आते हैं जहाँ सीधी चट्टानों पर शरीर को संतुलित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन 11 साल की हridya ने आत्मविश्वास के साथ एक-एक कठिन हिस्से को पार किया। (Bhirvagad Children’s Day)
उनके पिता अमित चव्हाण बताते हैं, “हridya हमेशा से साहसी और प्रकृति प्रेमी रही है। हम हर ट्रेक को पूरी सुरक्षा के साथ प्लान करते हैं। भीरवगड कठिन जरूर है, लेकिन उसकी हिम्मत और अनुशासन ने इसे आसान बना दिया।”
चिल्ड्रन्स डे पर इस ट्रेक का पूरा होना और भी विशेष इसलिए था क्योंकि यह दिन बच्चों की क्षमता, साहस और उनकी असीम संभावनाओं का प्रतीक माना जाता है। हridya की इस उपलब्धि ने यह साबित किया कि यदि सही मार्गदर्शन, सुरक्षा और जुनून हो, तो बच्चे किसी भी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं।
हridya की मां ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बेटी की सफलता अन्य बच्चों को प्रकृति से जुड़ने और महाराष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहर की खोज करने के लिए प्रेरित करेगी। आधुनिक जीवनशैली में जहाँ बच्चे मोबाइल और स्क्रीन टाइम में अधिक व्यस्त रहते हैं, वहीं हridya जैसे युवा ट्रेकर्स नई पीढ़ी में आउटडोर गतिविधियों के प्रति उत्साह जगा रहे हैं।
हridya का यह साहसिक कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आने वाली पीढ़ियाँ महाराष्ट्र की पर्वत, किले और प्रकृति की धरोहरों को संजोने और समझने के लिए कितनी उत्सुक हैं।
Also Read: Malad Student Abduction Case:१९ वर्ष के छात्र ने ट्रांसजेंडर गैंग पर अपहरण व ब्लैकमेल का आरोप