भिवंडी: भिवंडी में आवारा कुत्तों के हमले ने एक बार फिर शहर में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं। शहर के एक इलाके में 12 वर्षीय लड़के को कुत्तों ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है और मनपा की लापरवाही को लेकर भारी गुस्सा फूट पड़ा है। (Bhiwandi Dog Attack)
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन नगर पालिका ने इस पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। इसी कारण से बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। लोगों ने कहा कि लगातार काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन नगर पालिका का नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान पूरी तरह से प्रभावी नहीं है।
जानकारी के अनुसार, पिछले साल भिवंडी में 11,037 कुत्तों द्वारा काटने की घटनाएं दर्ज की गईं। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शहर में आवारा कुत्तों का नियंत्रण न के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जाता, तो इस तरह की दुखद घटना टाली जा सकती थी।
इस घटना के बाद स्थानीय लोग मनपा कार्यालय के बाहर जमा हुए और कुत्तों के आतंक और प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ विरोध किया। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और शहर में रहने वाले नागरिकों की जान की रक्षा के लिए मनपा को तुरंत कदम उठाने होंगे।
नगर पालिका के अधिकारीयों ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और आवारा कुत्तों की संख्या कम करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मृतक बच्चे के परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल नसबंदी ही नहीं, बल्कि शहर में आवारा कुत्तों के लिए सुरक्षित आश्रय और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था भी जरूरी है। इसके साथ ही, नागरिकों को जागरूक किया जाना चाहिए कि वे ऐसे कुत्तों के संपर्क में आने से बचें और बच्चों को अकेले खेलने के लिए बाहर भेजने से पहले सतर्क रहें।
भिवंडी में यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि पूरे शहर में नागरिक सुरक्षा के महत्व को भी उजागर करती है। स्थानीय लोग और समाजसेवी इस मुद्दे पर लगातार ध्यान देने और प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। (Bhiwandi Dog Attack)
अंततः, यह घटना शहरवासियों को यह याद दिलाती है कि आवारा पशुओं का नियंत्रण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। शहर में बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। (Bhiwandi Dog Attack)
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