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Criminal Conspiracy: ₹400 करोड़ की नोटबंदी वाली नकदी लूट से हिली नासिक पुलिस, बिल्डर-नेता-पुलिस गठजोड़ के आरोप

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Criminal Conspiracy: ₹400 करोड़ की नोटबंदी वाली नकदी लूट

मुंबई: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों से पहले नासिक पुलिस एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। ₹2,000 के नोटों में रखी लगभग ₹400 करोड़ की नोटबंदी वाली नकदी की सनसनीखेज लूट का मामला सामने आया है, जिसमें बिल्डर, राजनेता और पुलिस अधिकारियों के गठजोड़ के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह नकदी कथित तौर पर चुनावी फंडिंग के लिए भेजी जा रही थी। (Criminal Conspiracy)

जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2025 में कर्नाटक से गुजरात भेजे जा रहे दो ट्रक कंटेनरों में यह नकदी रखी गई थी। यह खेप महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर स्थित चोरला घाट इलाके में बीच रास्ते में ही रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। बताया जा रहा है कि यह रकम अहमदाबाद स्थित एक आश्रम भेजी जा रही थी, जहां इसे कथित रूप से वैध मुद्रा में बदलने की योजना थी।

इस पूरे मामले की शिकायत नासिक के रियल एस्टेट एजेंट संदीप पाटिल ने पुलिस में दर्ज कराई है। पाटिल के अनुसार, यह नकदी कर्नाटक के एक बिल्डर द्वारा भेजी गई थी और इसका इस्तेमाल ठाणे के एक प्रभावशाली राजनेता के लिए किया जाना था, जो कथित तौर पर उस बिल्डर के करीबी बताए जाते हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह धनराशि राज्य की एक सक्रिय राजनीतिक पार्टी से जुड़ी हुई थी और इसे चुनावी खर्चों के लिए ले जाया जा रहा था।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि नासिक पुलिस के कुछ अधिकारियों ने बिना किसी आधिकारिक केस के इस नकदी को ट्रैक करना शुरू कर दिया था। आरोप है कि यह सब एक ठाणे-आधारित बिल्डर और एक राजनीतिक पदाधिकारी के इशारे पर किया जा रहा था। पाटिल का दावा है कि उनका इस लूट से कोई लेना-देना नहीं है, इसके बावजूद उन्हें इस चोरी का मास्टरमाइंड बताकर फंसाने की कोशिश की गई।

पाटिल ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं और कुछ लोगों ने कथित तौर पर बंदूक की नोक पर उनका अपहरण भी किया। उन्होंने इस संबंध में ऑडियो-वीडियो सबूत होने का दावा किया है, जिनमें पुलिस, एक बिल्डर और हवाला ऑपरेटर के बीच कथित सांठगांठ के संकेत मिलते हैं। (Criminal Conspiracy)

धमकियों और उत्पीड़न से परेशान होकर संदीप पाटिल ने नासिक (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की, जिसके बाद गोती पुलिस स्टेशन को मामले की जांच सौंपी गई। हालांकि, अब तक इस पूरे प्रकरण में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

नगर निगम चुनावों से ठीक पहले सामने आए इस मामले ने राज्य की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला चुनावी फंडिंग और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बड़े घोटाले के रूप में उभर सकता है। (Criminal Conspiracy)

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