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Indian stock market: भारतीय शेयर बाजार से ₹1.6 लाख करोड़ की निकासी के कारण

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Indian stock market: भारतीय शेयर बाजार से ₹1.6 लाख

2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से अभूतपूर्व निकासी की, जिससे कुल ₹1.6 लाख करोड़ (लगभग 18 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की रकम बाजार से बाहर चली गई। यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए अब तक का सबसे खराब वर्ष रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताएं, उच्च मूल्यांकन और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने निवेशकों को भारतीय इक्विटी से दूर कर दिया। (Indian stock market)

डिसंबर 26 तक के आंकड़ों के अनुसार, FPIs ने केवल शेयर बाजार से ₹1.58 लाख करोड़ निकाले, जबकि भारतीय डेट (ऋण) बाजार में उन्होंने ₹59,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया। इसका मतलब यह है कि निवेशक अभी भी भारतीय बाजार में रुचि रखते हैं, लेकिन इक्विटी की तुलना में सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निकासी मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण हुई। अमेरिकी बांड यील्ड्स में वृद्धि, डॉलर का मजबूत होना और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों में देरी ने विकसित बाजारों को उभरते बाजारों जैसे भारत की तुलना में अधिक आकर्षक बना दिया। इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार के उच्च मूल्यांकन ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी।

वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि जबकि 2025 का वर्ष FPI इक्विटी के लिए नकारात्मक रहा, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी ताकत और बढ़ते कॉर्पोरेट आय के कारण 2026 में स्थिति बदल सकती है। जब वैश्विक परिस्थितियां स्थिर होंगी और कंपनियों की कमाई में सुधार आएगा, तो विशेषज्ञ उम्मीद करते हैं कि विदेशी निवेश फिर से भारतीय शेयर बाजार में लौटेंगे।

इस रिकॉर्ड निकासी ने भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन पर भी असर डाला। बड़ी मात्रा में निवेशकों की निकासी से बाजार में दबाव बना और निवेशकों में अस्थिरता बढ़ी। हालांकि, देश की मजबूत आर्थिक नींव और सरकार की नीतिगत सुधार योजनाएं लंबी अवधि में निवेशकों के विश्वास को बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की निकासी केवल अल्पकालिक दबाव को दर्शाती है। भारतीय इक्विटी बाजार की संरचना और बढ़ते उपभोक्ता बाजार की वजह से निवेशकों को लंबे समय में सकारात्मक रिटर्न की संभावना है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों का डेट मार्केट में निवेश यह संकेत देता है कि भारत अभी भी निवेश के लिए सुरक्षित और आकर्षक विकल्प बना हुआ है।

इस घटना ने भारतीय निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को यह समझने का अवसर दिया कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, मुद्रा उतार-चढ़ाव और उच्च मूल्यांकन से बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट हुआ कि स्थिरता और मजबूत कमाई की उम्मीद निवेशकों को वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। (Indian stock market)

संक्षेप में, 2025 में विदेशी निवेशकों का रिकॉर्ड पलायन भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में सुधार की संभावना है। मजबूत आर्थिक नींव और वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता के साथ, भारतीय शेयर बाजार फिर से निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। (Indian stock market)

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