घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है. इसलिए सरकार को इस घटना की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. मराठा सेवा संघ के नेता पुरूषोत्तम खेडेकर ने आरोप लगाया है कि यह चुनाव के मद्देनजर मराठा समुदाय में दंगे कराने की सरकार की साजिश है.(Serious Crimes)
घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है. इसलिए सरकार को इस घटना की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. मराठा सेवा संघ के नेता पुरूषोत्तम खेडेकर ने आरोप लगाया है कि यह चुनाव के मद्देनजर मराठा समुदाय में दंगे कराने की सरकार की साजिश है. राज्य में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. वहीं पुलिस ने कल के प्रदर्शन के 350 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. खास बात ये है कि इन प्रदर्शनकारियों पर कई गंभीर अपराध दर्ज होने से प्रदर्शनकारी और भी ज्यादा उग्र हो गए हैं.
अंतरवाली सराती गांव में कल हुई रैली के बाद पुलिस अलर्ट मोड पर है. गोंडी पुलिस स्टेशन में 350 मराठा आंदोलनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. कल प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया. इसलिए ये मामले दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने धारा 307, 333, 332, 353, 427, 435, 120 (बी), 143, 147, 148, 1499, मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 135 और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की रोकथाम अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया है। इससे प्रदर्शनकारी और अधिक उत्तेजित हो गये हैं.(Serious Crimes)
इस बीच जालना में कल की घटना की गूंज आज भी है. जालना शहर के अंबाद चौफुली में मराठा संगठनों ने अंतरवाली सराती की घटना के विरोध में सड़क जाम कर दी. इस बार हिंसक भीड़ ने निजी वाहनों में तोड़फोड़ की. पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
औरंगाबाद क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ज्ञानेश्वर चव्हाण और जालन्या जिला कलेक्टर कृष्ण नाथ पांचाल ने कल की घटना में घायल हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने कल लाठीचार्ज के दौरान घायल हुए पुलिस कर्मियों से अस्पताल में मुलाकात की।
कल का लाठीचार्ज बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. आरक्षण को लेकर आम नागरिकों में घमासान मचा हुआ है. संविधान द्वारा दिये गये अधिकार के अनुसार हमें उपवास करने का अधिकार है. लेकिन पुलिस आकर इस तरह से लाठीचार्ज करे ये ठीक नहीं है. हमारा विवाद पुलिस से है या सरकार से. पुलिस को आगे लाकर इस तरह आंदोलन को रोकना ठीक नहीं है. हमें दुख है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मराठा हैं. उन्हें हमारी भावनाओं को समझने की जरूरत थी।’ लेकिन कौन आ रहा है? ये सवाल पूछा है मराठा संयोजक विनोद पाटिल ने.
अग्निकुंड में धुएँ की नलिकाएँ छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी। गोली चलाने की कोई जरूरत नहीं थी. क्या ये प्लानिंग थी? क्या अधिकारी ने लिया ये फैसला? क्या ऐसा ही था? या सरकार ने निर्देश दिये? विनोद पाटिल ने मांग की कि इसकी जांच होनी चाहिए.
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