महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय स्तर पर नामांकन में अनियमितताओं के बाद 7.5 मिलियन से अधिक राशनकार्ड धारकों को मुफ्त राशन योजना से हटा दिया है। यह कदम सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कि केवल योग्य परिवार ही फ्री राशन का लाभ लें। केंद्र ने राज्य के 1.78 करोड़ राशनकार्ड धारकों को संभावित अयोग्य बताते हुए नाम भेजे थे। (Maharashtra)
राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा भेजे गए डेटा के आधार पर पिछले साल जुलाई से एक व्यापक सत्यापन अभियान शुरू किया। इस दौरान अधिकारियों ने घर-घर जाकर परिवारों की आय और निवास की स्थिति की जांच की। मृतक, स्थानांतरित या आय सीमा पार करने वाले लाभार्थियों के नाम हटाए गए। अब तक 7.5 मिलियन नाम हटाए जा चुके हैं और शेष का सत्यापन जारी है।
महाराष्ट्र में वर्तमान में लगभग 6.8 करोड़ लाभार्थी 16.5 मिलियन पीले और नारंगी राशनकार्ड के माध्यम से 5 किलो मुफ्त अनाज प्रति व्यक्ति प्रति माह पाने के पात्र हैं। पीले राशनकार्ड उन परिवारों को दिए जाते हैं जिनकी वार्षिक आय 15,000 रुपये तक होती है, जबकि नारंगी कार्ड 1 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों को मिलते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि हटाए गए लाभार्थियों की जगह योग्य नए परिवारों को सूची में जोड़ा जाएगा। केंद्र द्वारा प्रायोजित यह योजना अब भी पात्र परिवारों के लिए जारी रहेगी। जिन लोगों की आय सीमा अधिक होने के कारण उन्हें सूची से हटाया गया, उन्हें सफेद राशनकार्ड जारी किए गए हैं।
आय सीमा और पात्रता मानदंडों की समीक्षा भी की जा रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद निर्धारित आय सीमा अब पुराने हो चुकी है। अब महाराष्ट्र सरकार एक समिति के माध्यम से नए मानदंड तय करने पर विचार कर रही है। अन्य राज्यों ने आय सीमा को 1.4 लाख से 2.4 लाख रुपये तक बढ़ा दिया है। (Maharashtra)
इस सत्यापन अभियान से राज्य में राशन वितरण अधिक पारदर्शी होगा और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया से न केवल अनुचित लाभ खत्म होगा बल्कि सूची में नए योग्य परिवारों को भी शामिल किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, यह कदम राज्य में मुफ्त राशन वितरण में सुधार और सही लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। (Maharashtra)
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