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Mayor Election:बीजेपी-शिंदे गुट में जारी दावेदारी मंथन

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Mayor Election:बीजेपी-शिंदे गुट में जारी दावेदारी मंथन

मुंबई में महापौर के पद को लेकर सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। वर्तमान महापौर पद का कार्यकाल 11 फरवरी को समाप्त होने वाला है, और इसी दिन नए महापौर का नाम भी सामने आ सकता है। इस बार महापौर का पद महिला आरक्षित है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच दावेदारी और भी गर्म हो गई है। (Mayor Election)

राजनीतिक हलकों में खबर है कि बीजेपी और शिंदे गुट में इस पद को लेकर मंथन लगातार जारी है। दोनों पक्ष अपने-अपने उम्मीदवारों को महापौर पद के लिए आगे कर सकते हैं। महिला आरक्षण के कारण यह चुनाव और भी खास हो गया है, क्योंकि इसे देखते हुए पार्टियों ने अपने संभावित चेहरे को लेकर रणनीति तैयार की है।

बीजेपी की तरफ से अनुमान लगाया जा रहा है कि पार्टी किसी अनुभवी महिला नेता को महापौर पद के लिए आगे कर सकती है। वहीं, शिंदे गुट ने भी अपने अंदरूनी सर्वे और चर्चाओं के आधार पर उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार महापौर पद पर किसी के पक्ष में समर्थन मिलने के लिए दलों को गठबंधन और बैलेंसिंग करनी पड़ सकती है।

मुंबई महापौर का पद सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। यह शहर के विकास कार्यों, बजट अनुमोदन और नगर निगम की योजनाओं को प्रभावित करने वाला पद है। इसलिए राजनीतिक दल इस चुनाव को लेकर बेहद संवेदनशील और सतर्क हैं।

स्थानीय मीडिया और राजनीतिक संवाददाताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों की बैठकों और घोषणाओं पर जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की निगाहें टिकी रहेंगी। 11 फरवरी को महापौर पद का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही नए महापौर का ऐलान हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के महापौर चुनाव में केवल पार्टी की ताकत ही नहीं, बल्कि महिला आरक्षण और गठबंधन की भूमिका भी निर्णायक हो सकती है। इसी वजह से बीजेपी और शिंदे गुट दोनों अपने उम्मीदवार को लेकर रणनीतिक फैसले लेने में समय ले रहे हैं।

मुंबईवासियों की नजर भी इस चुनाव पर टिकी है, क्योंकि महापौर की नीतियां और नगर निगम के कामकाज सीधे शहर के नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं। इस बार का चुनाव इसलिए और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि 11 फरवरी के बाद सस्पेंस खत्म होगा और नए महापौर के नाम के साथ शहर में प्रशासनिक कामकाज को नई दिशा मिलेगी। राजनीतिक पार्टियों की तैयारियों और बैठकों से यह स्पष्ट है कि महापौर पद की लड़ाई सिर्फ प्रतिष्ठा की नहीं, बल्कि नगर निगम की भविष्य की नीतियों में भी अहम भूमिका निभाएगी। (Mayor Election)

इस प्रकार, मुंबई महापौर पद को लेकर सस्पेंस 11 फरवरी तक जारी रह सकता है, और उसके बाद राजनीतिक परिदृश्य और शहर के प्रशासनिक कामकाज में बदलाव की उम्मीद है। (Mayor Election)

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