शिवसेना (यूबीटी) ने महायुति सरकार के *infrastructure* और विकास के बड़े-बड़े दावों पर करारा हमला बोला है। पार्टी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार पर दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। (Mokhada Incident)
मुखपत्र *Saamana Editorial* में कहा गया है कि जब मुंबई से कुछ ही घंटों की दूरी पर लोग खराब सड़कों, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं और अविश्वसनीय *ambulance systems* के कारण पीड़ित हैं, तो सरकार की *development* की बातें केवल “खोखले शब्द” और “रंग-बिरंगे गुब्बारे” हैं। यह लेख *viral seo* के लिए महत्वपूर्ण है।
इस तीखी आलोचना की वजह पालघर जिले के आदिवासी बहुल मोखाडा में हुई एक शर्मनाक घटना है। प्रसव के बाद एक *tribal woman* और उसके नवजात शिशु को कथित तौर पर एम्बुलेंस ड्राइवर ने घर से दो किलोमीटर पहले ही उतार दिया, जिससे उन्हें पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ा। ठाकरे गुट ने इस घटना को “व्यवस्थागत उपेक्षा” (*Systemic Neglect*) का उदाहरण बताया।
संपादकीय में सवाल किया गया है कि मुख्यमंत्री जिस मुंबई के *transformation* की बात करते हैं, मोखाडा उससे बस ‘पत्थर फेंकने की दूरी’ पर है। यदि एक प्रसूता आदिवासी महिला के साथ एम्बुलेंस चालक इतनी लापरवाही कर सकता है, तो उनके विकास के ‘विजन’ का क्या उपयोग? (Mokhada Incident)
सामना ने जोर देकर कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी वाडा-मोखाडा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी जरूरतें, जैसे अच्छी सड़कें, *health facilities, और विश्वसनीय एम्बुलेंस सेवाएँ, गायब हैं। गर्भवती महिलाओं को सड़कों की कमी के कारण अक्सर ‘झोली’ (zoli) या ‘डोली’ (doli*) में अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे रास्ते में ही प्रसव या मौत हो जाती है।
ठाकरे कैंप ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि मेट्रो नेटवर्क और एक्सप्रेस-वे जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करने से पहले, गरीब और दूरदराज के आदिवासी समुदायों की *Basic Facilities* को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि सुशासन का असली पैमाना सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक आवश्यक सेवाओं का पहुँचना है। (Mokhada Incident)
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