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मुंबई ऑटो ड्राइवरों का ₹800 शुल्क के खिलाफ विरोध

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मुंबई में ऑटो रिक्शा ड्राइवरों ने मंगलवार को अंधेरी RTO के सामने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। ड्राइवर और मालिक राज्य के वेलफेयर बोर्ड के तहत अनिवार्य पंजीकरण और 800 रुपये के शुल्क के खिलाफ सड़कों पर उतरे। यूनियनों ने इसे अनुचित करार दिया और अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे परमिट और क्लियरेंस में देरी कर ड्राइवरों को मजबूर कर रहे हैं।

इस विरोध प्रदर्शन में कई ऑटो यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने बढ़ते वित्तीय दबाव और सरकारी तंत्र की अनियमितताओं को लेकर अपनी नाराजगी जताई। यूनियन नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने किसी भी व्यापक परामर्श के बिना यह निर्णय लागू किया, जिससे पूरे क्षेत्र में असंतोष फैल गया है।

विरोध का केंद्र बिंदु 800 रुपये का शुल्क है, जिसमें 500 रुपये पंजीकरण शुल्क और 300 रुपये वार्षिक शुल्क शामिल हैं। यूनियनों का कहना है कि वेलफेयर बोर्ड का उद्देश्य कामगारों का समर्थन करना होना चाहिए, न कि उनके लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ पैदा करना।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी पंजीकरण प्रक्रिया को कठिन और लंबा बना रहे हैं, ताकि ड्राइवर मजबूर होकर अतिरिक्त भुगतान करें। उन्होंने यह भी कहा कि इस शुल्क ने छोटे और सीमित संसाधनों वाले ऑटो ऑपरेटरों पर विशेष दबाव डाला है।

ड्राइवरों ने घोषणा की कि वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि पंजीकरण शुल्क को कम किया जाए या पूरी तरह से माफ किया जाए और वेलफेयर बोर्ड के तहत सुविधाएं केवल उन लोगों के लिए लागू की जाए जो वास्तव में इसका लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शी और तेज़ प्रक्रिया सुनिश्चित करने की भी अपील की।

इस प्रदर्शन के दौरान कई ड्राइवरों ने अपने ऑटो रिक्शा रोककर नारेबाजी की और विरोध के संकेत दिखाए। यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो भविष्य में और भी व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की स्थिति राज्य के परिवहन क्षेत्र में असंतोष बढ़ा सकती है, खासकर तब जब छोटे और मझोले ऑटो ऑपरेटरों पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। इसके साथ ही यह सरकार और ड्राइवरों के बीच विश्वास की कमी को भी दर्शाता है।

ऑटो यूनियन नेताओं ने मीडिया से कहा कि उनका उद्देश्य केवल शुल्क और पंजीकरण प्रक्रिया के मुद्दों को उजागर करना है, और वे सार्वजनिक यातायात सेवा को प्रभावित करने का इरादा नहीं रखते। हालांकि, यह विरोध प्रदर्शन यह दिखाता है कि ड्राइवर आर्थिक निर्णयों और नीतियों पर सीधा असर महसूस कर रहे हैं।

इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के निर्णय का उद्देश्य वेलफेयर बोर्ड को मजबूत करना बताया गया है, लेकिन ड्राइवरों और यूनियनों का कहना है कि इसे लागू करने का तरीका गलत है और इसे सुधारने की जरूरत है।

प्रदर्शन के दौरान कई ड्राइवरों ने सोशल मीडिया पर भी अपने विरोध की झलक साझा की, जिससे विरोध की व्यापकता और जनता तक पहुंच स्पष्ट हुई।

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