मुंबई: हर साल मानसून के दौरान मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेनों पर लगने वाले ब्रेक को रोकने के लिए पश्चिम रेलवे (WR) ने इस बार समय से पहले ही एक व्यापक कार्ययोजना की घोषणा कर दी है। चर्चगेट से विरार के बीच के उपनगरीय कॉरिडोर पर जलभराव और तकनीकी खराबी को कम करने के लिए रेलवे प्रशासन ने 25 मई 2026 तक सभी तैयारियां पूरी करने का लक्ष्य रखा है। (Mumbai Local)
126 पंप और 600 मक ट्रेनों की तैनाती
बाढ़ शमन रणनीति के तहत, पश्चिम रेलवे संवेदनशील स्थानों पर 126 नए डीवाटरिंग पंप स्थापित करेगा। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 10% अधिक है। इन पंपों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए मानसून शुरू होने से 30 दिन पहले रोजाना इनका परीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पटरियों और ड्रेनेज चैनलों से गाद, कचरा और मलबे को साफ करने के लिए 600 मक (Muck) ट्रेनों को तैनात किया जाएगा, जो पिछले साल की तुलना में 80% अधिक है।
ड्रेनेज अपग्रेड और ट्रैक की ऊंचाई
पिछले वर्ष माहिम-दादर जैसे निचले इलाकों में भारी जलभराव देखा गया था। इसे ध्यान में रखते हुए, रेलवे ने गोरेगांव-माहिम, प्रभादेवी-माटुंगा और बोरीवली-विरार सेक्शन में भूमिगत जल निकासी प्रणाली को अपग्रेड किया है। साथ ही, कुछ चिन्हित स्थानों पर पटरियों के स्तर को ऊपर उठाया गया है ताकि भारी बारिश में ट्रैक डूबने का खतरा कम हो सके। (Mumbai Local)
हाई-टेक मॉनिटरिंग सिस्टम
सटीक निगरानी के लिए पांच ऑटोमैटिक रेन गेज (बारिश मापने के यंत्र) लगाए गए हैं। साथ ही, चार संवेदनशील पुलों पर रियल-टाइम वॉटर लेवल वार्निंग सिस्टम सक्रिय किए जाएंगे, जो पानी का स्तर बढ़ते ही तत्काल अलर्ट जारी करेंगे।
अतिरिक्त मैनपावर और सुरक्षा
मानसून से संबंधित कार्यों के प्रबंधन के लिए 36 अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नालों की सफाई, पेड़ों की छंटाई और अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्त निरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाखों यात्रियों को मानसून के दौरान भी सुरक्षित और सुचारू रेल सेवा मिल सके। (Mumbai Local)
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