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Sanjay Raut: “चुनाव लड़ो, बहुमत पाओ” ,संजय राऊत का वारिस पठान के बयान पर करारा जवाब

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Sanjay Raut: “चुनाव लड़ो, बहुमत पाओ”

BMC चुनाव 2026 के लिए शहर में राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है।  (Sanjay Raut)

15 जनवरी 2026 को 227 वार्डों पर होने वाले इन चुनावों के बीच एक बार फिर मयार (Mayor) की उठा‑पटक और पहचान‑आधारित बयानबाज़ी ने सियासी हलकों में जोर पकड़ा है।

जैसे ही लोकसभा चुनावों के बाद BMC में सत्ता‑संघर्ष और गठजोड़े की रणनीतियाँ उभर रही हैं, उसी बीच AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने एक विवादित सवाल उठाया जिसका राजनीतिक प्रतिध्वनि ज़्यादा है। पठान ने प्रश्न किया कि “मुंबई का महापौर खान, पठान, शेख, सय्यद या अन्सारी क्यों नहीं बन सकता?” और संविधान के समान अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि हर समुदाय को राजनीतिक पदों में समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

वारिस पठान की टिप्पणी ने चुनावी माहौल में धार्मिक‑पहचान और सामाजिक न्याय के मुद्दे को उभारा। उन्होंने कहा कि संविधान सबको बराबरी का दर्जा देता है और “एक दिन हिजाब पहनी महिला भी महापौर बन सकती है”I यह उस समानता की भावना का प्रतीक है जिसे वे समर्थन देते हैं।

पठान ने यह भी कहा कि मुंबई जैसे महानगर में अगर किसी समुदाय का व्यक्ति मुम्बईकर होने का दावा करता है, तो उसे चुनाव में उतरकर जनता‑सहयोग हासिल करना चाहिए ,क्योंकि सीटें और सत्ता मतदान परिणामों से ही तय होती हैं अनेक बार।

उनका बयान ऐसे समय में आया जब मुंबई के राजनीतिक परिदृश्य में कई दलों ने अपने संकेत जारी किए हैं कि वे किस तरह की पहचान, क्षेत्रीयता और सामाजिक विविधता पर चुनाव लड़ेगें।

इन टिप्पणियों पर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राऊत ने शुक्रवार को तीखा जवाब दिया। राऊत ने कहा कि “राजनीति पहचान के नाम पर नहीं, बल्कि बहुमत और लोकतंत्र के आधार पर जीती जाती है।” उनका कहना था कि अगर कोई उम्मीदवार मान्यताओं और वोट बैंक के साथ चुनाव लड़े और 110 से अधिक सीटें जीते, तो वही महापौर बन सकता है।

संजय राऊत ने यह भी जोर देकर कहा कि मुंबई सहित महाराष्ट्र की राजनीति में “मराठी‑बोली वाले व्यक्ति का महापौर बनना” एक परंपरागत और स्थानीय भावना है, जिसे उनके अनुसार खासकर स्थानीय नागरिक महत्व देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वारिस पठान खुद को एक “सच्चे मुम्बईकर” मानते हैं, तो उन्हें चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करनी चाहिए।

राऊत ने उल्लेख किया कि भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति जैसे जाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली अहमद, और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भी देश के उच्चतम पदों तक पहुँचे हैं, इसलिए पहचान‑आधारित बहस को बढ़ावा देना सही नहीं है।

संजय राऊत के बयान से पहले ही राज ठाकरे ने कहा कि अगला महापौर “मराठी मानूस” का होना चाहिए और उनका दल इस मुद्दे पर मजबूती से खड़ा है। इस बयान ने मुद्दे को और अधिक पहचान‑आधारित अथवा क्षेत्रीयता के पक्ष में मोड़ दिया है।

राज ठाकरे ने कहा कि “महाराष्ट्र किसी भी विवाद से बड़ा है” और मराठी पहचान की सुरक्षा इस गठबंधन का एक प्रमुख एजेंडा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय मतदाताओं को एकजुट करना है।

बीएमसी चुनाव 2026 न केवल महापौर पद बल्कि मुंबई के भविष्यों को तय करने वाला भी माना जा रहा है। भाजपा से लेकर महायुति‑गठबंधन और एमवीए तक, हर पक्ष अपनी रणनीति लेकर मैदान में है। कुछ राजनीतिक दल विकास, मूलभूत सुविधाएं और भ्रष्टाचार विरोध जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि अन्य स्थानीय पहचान, सामाजिक विविधता और समानता के मुद्दे को सामने रख रहे हैं। (Sanjay Raut)

भाजपा के मुंबई प्रमुख ने वारिस पठान के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे “मुंबई की पहचान और हिन्दुत्व‑DNA के खिलाफ” कुछ बातों का समर्थन नहीं करेंगे।

राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा BMC और 28 अन्य नगर निगमों के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना की तारीखों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इस चुनाव को पिछले वर्षों के सबसे प्रतिस्पर्धात्मक लोकल बॉडी चुनावों में से एक माना जा रहा है। (Sanjay Raut)

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