मुंबई: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सोमवार, 26 जनवरी को कहा कि महाराष्ट्र का रंग हमेशा केसरिया ही रहेगा। यह बयान उस राजनीतिक विवाद के बीच आया है जिसमें AIMIM नेताओं के हालिया बयान को लेकर हलचल मची थी। (SanjayRaut Statement)
AIMIM नेताओं सहार शेख, इम्तियाज जलील और वारिस पठान ने दावा किया था कि उनके पास महाराष्ट्र को “हरा” रंग देने और पार्टी की राष्ट्रीय उपस्थिति बढ़ाने का अधिकार है।
राउत ने कहा, “लेकिन हरित रंग किसी का निजी नहीं है। क्या हम हिंदू हैं या कोई और समुदाय?” उनका यह बयान ठाणे सिटी चुनाव 2026 के बाद आए बयान के संदर्भ में आया, जिसमें AIMIM नेता सहार शेख ने जीत के बाद कहा था कि “मुंब्रा को हरे रंग में रंगा जाएगा।” शेख ने वार्ड 30 से जनवरी 15 के चुनाव में जीत हासिल की थी।
संजय राउत ने आगे कहा, “इंद्रधनुष के सात रंग पूरी दुनिया के लिए हैं। राजनीति में अलग-अलग पार्टियों के अलग-अलग रंग जुड़े हुए हैं। जैसे, नीला झंडा डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के लिए है, वहीं राष्ट्रीय समाज पार्टी का पीला झंडा है।” राउत ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल के रंग को किसी विशेष समुदाय या वर्ग से जोड़ना गलत है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बयान के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। AIMIM के ‘हरा’ रंग का बयान और उसके बाद शिवसेना के नेता द्वारा ‘केसरिया’ रंग को राज्य का प्रतीक बताना दोनों ही पार्टियों की राजनीतिक छवि को और स्पष्ट करता है।
संजय राउत के बयान का उद्देश्य राज्य में सांप्रदायिक राजनीति और रंग के प्रतीकों को किसी एक समुदाय तक सीमित करने की प्रवृत्ति को चुनौती देना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में रंग केवल पहचान का प्रतीक होते हैं, न कि किसी समुदाय का। (SanjayRaut Statement)
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ा है, जहां लोग AIMIM के ‘हरा’ बयान और राउत के ‘केसरिया’ बयान को लेकर अलग-अलग टिप्पणियां कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे से अगले विधानसभा चुनावों में भी बयानबाजी और राजनीतिक तकरार तेज हो सकती है।
इस तरह, महाराष्ट्र में राजनीतिक रंग और प्रतीक को लेकर यह विवाद अब राज्य की सियासी बहस का हिस्सा बन गया है। नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह मामला केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी बन गया है। (SanjayRaut Statement)
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