सोलापुर महापालिका चुनाव से ठीक पहले शरद पवार गुट को बड़ा झटका लगा है। सोलापुर में दो माजी महापौरों ने अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में प्रवेश कर लिया है। इस कदम को ऐन चुनाव से ठीक पहले शरद पवार गुट के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। (Sharad Pawar)
सूत्रों के अनुसार, माजी महापौर यू.एन. बेरिया और माजी महापौर नलिनी चंदेले ने राष्ट्रीय और स्थानीय नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में प्रवेश किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री दत्ता भरणे भी उपस्थित रहे। उनके साथ ही अन्य कई स्थानीय नेताओं ने भी अजित पवार गुट में शामिल होने का निर्णय लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सोलापुर में इस कदम से शरद पवार गुट की स्थिति कमजोर हो सकती है। पहले ही पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महापालिकाओं में राष्ट्रवादी कांग्रेस की युति टूटने की चर्चाएँ तेज थीं। ऐसे समय में माजी महापौरों का अजित पवार गुट में प्रवेश शरद पवार गुट के लिए गंभीर झटका है।
सिर्फ सोलापुर ही नहीं, बल्कि पुणे और धुळा में भी शरद पवार गुट को नुकसान उठाना पड़ा है। पुणे के माजी महापौर प्रशांत जगताप ने शरद पवार गुट का त्याग कर कांग्रेस में प्रवेश किया। उन्होंने अजित पवार और शरद पवार की युति का विरोध किया और शरद पवार गुट से अपना राजीनामा दे दिया।
इसी तरह, धुळा के शिंदखेडा तालुका में कामराज भाऊसाहेब निकम, जो शरद पवार गुट के प्रदेश चिटणीस और जिला परिषद के माजी उपाध्यक्ष थे, ने भी दो दिन पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौजूदगी में गुट में प्रवेश किया। इस कदम को शरद पवार गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इन नेताओं का अजित पवार गुट में शामिल होना आगामी महापालिका चुनावों पर असर डाल सकता है। इस प्रवेश से ना केवल शरद पवार गुट की राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई है, बल्कि अजित पवार गुट को स्थानीय स्तर पर अधिक ताकत और लोकप्रियता मिली है। (Sharad Pawar)
विशेष रूप से, सोलापुर और धुळा में इस कदम से चुनावी रणनीतियों पर असर पड़ने की संभावना है। कई मतदाताओं का रुझान अब नए गुट की ओर हो सकता है। राजनीतिक दलों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगामी चुनावों में शरद पवार और अजित पवार गुट किस तरह से अपने अभियान और गठबंधन को मजबूत करते हैं।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव से ठीक पहले नेताओं के गुट बदलने की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
शरद पवार गुट को चुनौती के रूप में इन प्रवेशों का सामना करना पड़ रहा है और अजित पवार गुट को इससे बड़ी राजनीतिक मजबूती मिली है। (Sharad Pawar)
Also Read: Marriage Controversy: उच्चशिक्षित जोड़े का प्रेम विवाह 24 घंटे में ही समाप्त, वजह हुई चर्चा का विषय