मुंबई: 2026 के बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव ‘ठाकरे ब्रांड’ के लिए सबसे बड़ा परीक्षा स्थल साबित हुए। उद्धव और राज ठाकरे की लंबे समय बाद हुई राजनीतिक पुनर्मिलन को यह माना जा रहा था कि यह मराठी एकता की प्रतीक बनकर चुनाव में BJP-महायुति के खिलाफ मुकाबला मजबूत करेगी। (Thackeray Political Decline)
लेकिन चुनाव परिणाम ने पूरी कहानी बदल दी। BJP-महायुति गठबंधन ने 227 में से 118 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, और ठाकरों का लगभग तीन दशक लंबा शासन खत्म हो गया। अब शहर में सत्ता का केंद्र BJP और शिंदे शिवसेना के हाथ में है।
विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे ब्रांड की हार के पीछे 5 प्रमुख कारण हैं:
मराठी वोट का विभाजन: उद्धव और राज ठाकरे की एकजुटता के बावजूद, शिंदे शिवसेना ने मराठी वोट बैंक का बड़ा हिस्सा कब्जा कर लिया। विभाजन ने ठाकरे ब्रांड की जमीन कमजोर कर दी।
BJP का विकास और रणनीति केंद्रित अभियान: बीजेपी ने महायुति की ओर से विकास, बुनियादी ढांचा और शहर के मुद्दों पर जोर देकर चुनावी रणनीति अपनाई। इसके चलते मतदाताओं ने भावनात्मक आधार पर वोट देने के बजाय वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता दी।
ठाकरे (UBT) और MNS के बीच नीति असंगति: शिवसेना (UBT) और MNS के बीच कोई स्पष्ट नीति और साझा चुनावी रणनीति न होने से वोटों का सही समन्वय नहीं हो पाया।
कांग्रेस का अलग मोर्चा: कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा, जिससे विपक्ष के मत विभाजित हुए। इससे ठाकरे गठबंधन को अपेक्षित वोटों में कमी आई।
संगठनात्मक कमजोरी: ठाकरों की पार्टी संगठनात्मक रूप से मजबूत न होने के कारण ground level पर चुनावी मशीनरी प्रभावी नहीं रही। पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर पर प्रभाव सीमित दिखा।
विशेषज्ञों का कहना है कि उद्धव और राज ठाकरे ने भावनाओं और मराठी गौरव के सहारे वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन जमीनी हकीकत और चुनावी रणनीति में कमी के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। वहीं, शिंदे शिवसेना ने खुद को बाला साहेब ठाकरे की असली विरासत का सच्चा उत्तराधिकारी के रूप में पेश कर भावनात्मक और विकास दोनों ही तरह के मत हासिल किए। (Thackeray Political Decline)
इस चुनाव के परिणाम ने साफ कर दिया कि मुंबई में ठाकरों का प्रभुत्व खत्म हो चुका है, और आगामी दिनों में शहर की सियासत में नई स्थिति का निर्माण होगा। अब शिवसेना (UBT) के लिए यह चुनौती है कि वह अपने संगठन को मजबूत कर और नीतिगत एकता लाकर भविष्य में फिर से वापसी करने की रणनीति बनाए। (Thackeray Political Decline)
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