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फैसला देने में दो महीने की देरी हुई जज ने मांगी माफी

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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में इअसा पहली बार हुआ हैं की किसी जज ने माफी मांगी हैं फैसला सुनने में देरी के लिए जज ने माफी मांगी हैं मारतमेल जस्टिस भूषण गावै ने जंगलवार को एक नुठी मिशाल पेश की उन्होंने पक्षकारों को फैसले में देरी की वजह बताई किसी जज के माफी मांगने का यह पहला उदाहरण हैं चंडीगढ़ में एक आवसीय घर में एक अपार्टमेंट से संबधित मामला नययमूर्ति भूषण गावै की पीठ के समक्ष था इस अपार्टमेंट में किये गए बदलाव के खिलफ़्ह एक याचिका दायर की गयी है जस्टिस गवई के अध्यक्षता वाली बेंच ने 3 नवंबर को याचिका पर फैसला सुरक्षित किया था यह नतीजा मंगलौर को मिला उस समय गवई ने कहा की सबसे पहले में इस नैटजे में देरी के लिए माफी मांगता हु हमें इस मामले में देरी के लिए माफी मांगता हु हमें इस मामले में नियमों तथ्यों कानून के पारवधानों का अध्यन करना था इसलिए इसमें समय लगा

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