महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लेने की तैयारी कर ली है। अब महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए मराठी भाषा (Marathi Language) का ज्ञान होना अनिवार्य होगा। फडणवीस सरकार ने इसका पूरा मसौदा (Draft) तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा। (Maharashtra Transport Rule)
क्या है नया नियम और प्रस्तावित बदलाव?
राज्य परिवहन विभाग ने महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4, 78 और 85 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। इस नए नियम के तहत:
लाइसेंस और परमिट: नया परमिट या लाइसेंस लेते समय आवेदक की मराठी भाषा के ज्ञान की कड़ी जांच की जाएगी।
नवीनीकरण (Renewal): वर्तमान में कार्यरत चालकों को भी अपना लाइसेंस रिन्यू करवाते समय यह साबित करना होगा कि उन्हें मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान है।
मीटर कैब के लिए अतिरिक्त शर्त: मीटर वाली टैक्सियों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को एक विशेष शर्त के रूप में जोड़ा गया है। (Maharashtra Transport Rule)
क्यों लिया गया यह फैसला?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य यात्री और चालक के बीच संवाद को बेहतर बनाना है। अक्सर भाषा के अंतर के कारण यात्रियों और चालकों के बीच विवाद या गलतफहमी पैदा होती है। स्थानीय भाषा को प्रोत्साहन देने से यात्रियों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं का यात्रा अनुभव अधिक सुरक्षित और आरामदायक होगा।
विरोध और सियासत के बीच बड़ा कदम
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में भाषा को लेकर पहले से ही बहस छिड़ी हुई है। एक ओर जहां राज ठाकरे की मनसे (MNS) इस फैसले का स्वागत कर रही है, वहीं कुछ अन्य संगठन इसे ‘क्षेत्रवाद’ का नाम दे रहे हैं। हालांकि, सरकार का रुख स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक सेवा देने वालों को स्थानीय संस्कृति और भाषा का सम्मान करना ही होगा। (Maharashtra Transport Rule)
निष्कर्ष: इस कानून के लागू होने के बाद, गैर-मराठी भाषी चालकों को लाइसेंस बरकरार रखने के लिए बुनियादी मराठी सीखनी होगी। यह ‘मराठी अस्मिता’ की दिशा में सरकार का एक बड़ा दांव माना जा रहा है।
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