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Shiv Sena (UBT): नगर परिषद चुनाव स्थगित करने पर राज्य चुनाव आयोग को घेरा

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Shiv Sena (UBT): नगर परिषद चुनाव स्थगित करने पर राज्य चुनाव आयोग को घेरा

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार को राज्य चुनाव आयोग (SEC) पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि *24 नगर परिषदों और 76 अन्य नगर परिषदों व नगर पंचायतों की 154 वार्डों के चुनावों को 20 दिसंबर तक स्थगित करना एक “सोचा-समझा राजनीतिक कदम” है*, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया अव्यवस्थित हो गई है। (Shiv Sena (UBT) )

पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग ने “साबित कर दिया है कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है” और उसे अचानक चुनाव टालने का कोई अधिकार नहीं है।

 *‘सामना’ में तीखा हमला: SEC को बताया ‘जोकर’*

पार्टी के मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय में ठाकरे गुट ने SEC को राजनीतिक खेल का “जोकर” करार दिया और आरोप लगाया कि *सरकार—विशेषकर बीजेपी—ने चुनाव आयोग को अपनी कठपुतली बना लिया है।* संपादकीय में कहा गया कि यह सब एक “योजना के तहत फैलाए गए भ्रम” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल *बीजेपी को लाभ पहुंचाना* है।

संपादकीय के अनुसार, SEC ने चुनाव प्रक्रिया को अदालत में लंबित मामलों का हवाला देकर टाल दिया, लेकिन सत्ता पक्ष द्वारा कथित रूप से मतदाताओं को लुभाने के लिए धनबल के उपयोग को नज़रअंदाज कर दिया। इसमें दावा किया गया कि *बीते चालीस वर्षों में इतने भ्रष्ट और महंगे चुनाव कभी नहीं देखे गए।*

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल करोड़ों रुपये खर्च कर वोटरों को प्रभावित करने की “निर्लज्ज प्रतियोगिता” में लगे हुए हैं। चुनाव स्थगित होने से उम्मीदवारों पर आर्थिक बोझ और बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें मतदाताओं को “नया लक्ष्मी-दीदार” कराने के लिए और पैसा खर्च करना पड़ेगा। (Shiv Sena (UBT))

*राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल*

ठाकरे गुट ने कहा कि महाराष्ट्र पहले ही *आठ लाख करोड़ रुपये के कर्ज* में डूबा हुआ है, फिर भी मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री चुनावी रैलियों में मनमाने वादे कर रहे हैं। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकारी खजाने में वादे पूरे करने के लिए पैसे नहीं हैं और सारी राजनीतिक गतिविधि “शासकों के निजी खजाने” के सहारे चल रही है।

शिवसेना (यूबीटी) ने मांग की कि मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री जनता के सामने राज्य की वित्तीय स्थिति स्पष्ट करें।

अंत में संपादकीय ने SEC से पूछा कि क्या वह *मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना चुनाव स्थगित कर सकता है*, और क्या शहरी विकास विभाग इस निर्णय में शामिल था। पार्टी ने मुख्यमंत्री द्वारा SEC की आलोचना को “सिर्फ दिखावा” बताया। (Shiv Sena (UBT))

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