फिल्म इंडस्ट्री को ड्रग्समय बनाने का कुचक्र

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री तब अचानक ड्रग्स मामले के चपेट आ गयी , जब सुशांत सिंह (Shusant Singh) की मौत को हत्या बता कर हंगामा खडा किया जाने लगा . सुशांत सिंह राजपूत (Shusant Singh) मौत मामले ने देखते ही देखते कई रंग बदले . इस मामले ने कई बखेड़े भी खड़े किये और राजनितिक तू तू – मैं मैं का कारन भी बना . कंगना रनौत और शिव-सेना का रार तो अब भी लोग नहीं ही भूले होंगे, जिसमे कंगना के मुखौटे के रूप में शिव-सेना के सामने दरअसल भाजपा साफ़ साफ़ दिख रही थी. खैर सारे उलट-फेर के बाद अब यह मामला पुनः आत्म-हत्या पर आ रुकी है, पर इसके साइड इफ्फेक्ट के रूप में वजूद में आये ” ड्रग्स – मामला ” अब भी शबाब पर है. इसमें नित नए अध्याय रोज जुड़ रहे हैं. रोज परत-दर-परत नए नए आयाम खुल रहे हैं. इंडस्ट्री की कुछ शाख्शियतें इस मामले की गिरफ्त में भी आयी हैं और कुछ शक के दायरे में नज़र आ रही हैं. एनसीबी की पड़ताल अभी जारी है. जरुरी है कि यदि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ आपराधिक गतिविधियाँ चल रही हैं, तो उस पर कानून का हंटर चलना ही चाहिए, पर सवाल यह उठता है कि क्या फिल्म इंडस्ट्री कोई अपराधी व्यक्ति है ?
फिल्म इंडस्ट्री कोई अपराध करनेवाला व्यक्ति नहीं है . यह एक औद्योगिक क्षेत्र है, जैसे अन्य उद्योग क्षेत्र है. फर्क बस इतना है कि अन्य उद्योगों के भांति यहाँ सिर्फ व्यापारिक उत्पाद नहीं उत्पादित होते. यहाँ के उत्पाद में भावनाएं हैं, रिश्ते हैं, संस्कार हैं, कला है, संगीत और बहुत कुछ है. ऐसी इंडस्ट्री को आज ड्रग्स की इंडस्ट्री के तौर पर प्रचारित – प्रसारित करने की जो कोशिशें हो रहीं हैं, दुर्भावनापूर्ण है. बिलकुल दुर्भाग्यपूर्ण ही है यह की एक इंडस्ट्री को बदनाम करने की कोशिश हो रही है, जिसमें सरकार, प्रशासन और मीडिया समानरूप से शामिल है. इनके ही साथ इंडस्ट्री के कुछ लोग भी जाने अनजाने इसका समर्थन कर उन तत्वों को बल देने में लगे हैं, जो इस कुत्सित (Shusant Singh) कार्य में लगे हैं . संभवतः इस तरह के कार्य किसी साजिश के तहत हो रहा हो, ऐसा प्रतीत तो होता है, पर यह कह पाना थोडा मुश्कील है की इसके पीछे है कौन और उनका मकशद क्या है ?
मकशाद किसी का कुछ भी रहे, पर चंद गुनाह और गुनाहगारों के आधार पर पूरी इंडस्ट्री को गुनाहगार सवित करना स्वयं में एक बड़ा गुनाह है. ऐसे भी तर्क के पैमाने पर देखा जाये तो फिल्म इंडस्ट्री में यदि ड्रग्स की चलन है , तो कोई जांच करा कर देख ले , अन्य इंडस्ट्री उक्त मामले में फिल्म इंडस्ट्री से इक्कीस ही सावित होगी. हमारा ऐसा कहने का यह मतलब कतई नहीं है कि इंडस्ट्री में चंद गुनाहगार हैं, तो उन्हें बख्श दिया जाये , बिलकुल भी नहीं. जरुरत है कि जिस तरह फिल्म इंडस्ट्री के ड्रग्स गुनाहगारों को कानून के दायरे में लाया जा रहा है, ठीक उसी तरह अन्य इंडस्ट्री के भी ड्रग्स गुनाहगारों को ढूंढ कर बहार निकाला जाना चाहिए और उन्हें सजा दी जनि चाहिए. हमारा मकशद देश का कोई भी भाग हो, उसे अपराधमुक्त करना हो, न कि अपराध के नाम पर अपराधियों को छोड़ उस भाग को ही बदनाम करना हमारा मकशद बन जाये .

Report by : Lallan Kumar Kanj

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