महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा अब और चिंताजनक होता जा रहा है।

एनसीआरबी(NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में किसानों की आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। ऐसे में सवाल यह है कि महाराष्ट्र में किसानों की खुदकुशी कब रुकेगी? महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्याओं की संख्या राज्य के लिए शर्म की बात है।क्योंकि किसान आत्महत्या के आंकड़ों में महाराष्ट्र शीर्ष पर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में किसानों की आत्महत्या की संख्या में 2020 में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दुर्भाग्यपूर्ण महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्याएं हुई हैं।अकेले महाराष्ट्र में 4,006 आत्महत्याएं हो चुकी हैं। 2020 में किसान आत्महत्या में महाराष्ट्र सबसे आगे है। और अब 2021 के पहले 10 महीनों में आत्महत्या की संख्या चिंताजनक है। विभिन्न कारणों से देश में सभी आत्महत्याओं में किसानों की हिस्सेदारी 7% है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने 28 तारीख को भारत में आत्महत्या के आंकड़े जारी किए हैं। नतीजतन किसानों और मजदूरों की आत्महत्याएं रुकने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं।

2016 में कुल 11 हजार 379 किसानों और मजदूरों ने आत्महत्या की।

2017 में 10 हजार 655 किसानों ने आत्महत्या की थी।

2018 में 10 हजार 349 किसानों ने आत्महत्या की।

2019 में कुल 10 हजार 281 ऐसे किसानों ने आत्महत्या की।

2020 में आत्महत्या के मामलों की संख्या 10 हजार 677 थी।

इस साल 2021 की संख्या इससे ज्यादा होने से देश की चिंता बढ़ गई है।
महाराष्ट्र में पिछले दस वर्षों में, सरकार ने सूखे और कई वजहों से किसानों के वित्तीय संकट को कम करने के लिए विभिन्न उपायों और ऋण माफी की घोषणा की है। इस साल फिर से भारी बारिश ने राज्य में कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि अब मदद राज्य सरकार ही देने वाली हैं । लेकिन सवाल यह है कि किसान उस आर्थिक मदद पर कैसे टिक पाएंगे। सवाल यह है कि प्रगति के कई शिखरों को पार करते हुए किसानों की आत्महत्याएं कब रुकेंगी ?

Report by: Tripti Singh

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