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बदली नवी मुंबई की तस्वीर, यहां की खेती खत्म- शरद पवार

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50 साल पहले बनी एक संस्था, पहले मुंबई आने वालों की संख्या ज्यादा होती थी।
ऐसी कई जगहों पर काम किया
मिल मजदूरों की संख्या करीब डेढ़ लाख हुआ करती थी।
श्रमिकों की मांगें पूरी की गईं, मिल मजदूरों के संगठन कम किए गए और लोगों की आजीविका नष्ट कर दी गई।
कुछ लोगों ने कई इलाकों में अपने इलाके रिजर्व कर रखे हैं।
बाजार में एकतरफा लेनदेन होता था, नवी मुंबई के बड़े बाजार के लिए लोगों ने काफी मेहनत की।
इमारत अच्छी बनी है लेकिन इसकी सालाना लागत क्या होगी यह बताओ।
खर्च दो माह बाद देखा गया है।
अच्छे कार्य प्रबंधन से अच्छी नींद आती है।
संगठन का नाम तभी दिया जाएगा जब संगठन बना हो लेकिन ठीक से काम करे।
राज्य केंद्र सरकार से संवाद होना जरूरी है।
56 फीसदी लोग खेती करते हैं और बाकी लोग।
पहले 80 प्रतिशत लोग कृषि में लगे हुए थे। नवी मुंबई की तस्वीर बदली है लेकिन यहां की खेती खत्म हो गई है।
विकास होता है लेकिन कृषि चली जाती है।
कृषि का समर्थन होना जरूरी है।
आज जो भी फल या अन्य कृषि उपज उपलब्ध है, वह किसानों के कारण ही है।
नई किस्में आने पर 10 हजार किसानों ने मिलकर काम किया है, इसलिए अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थ और सामान उपलब्ध हुए हैं।
तरह-तरह के तरीके जैसे पीतल, टूटे कान वाला प्याला, प्याला और कुर्सियाँ आ रही हैं।
बाजार ठीक से चले, किसानों के पसीने/माल की बेहतर कीमत मिले, संस्थाएं बननी चाहिए।

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