उध्दव ठाकरे का शौकिया फोटोग्राफर से सीएम बनने का सफर

फोटोग्राफी का शौक रखने वाले बालासाहेब के बेटे उद्धव कभी महाराष्ट्र के सीएम बनेंगे ऐसा कभी किसी नही सोचा होगा। लेकिन बेजोड़ फोटोग्राफर उध्दव आज महाराष्ट्र के बेहतरीन मुख्यमंत्री हैं ।

अपने पिता बालासाहेब ठाकरे के नक्शे कदम पर चलकर ऊध्दव ठाकरे ने कामयाबी की कई मिसाल पेश की। आज वे महाराष्ट्र के 19 वें मुख्यमंत्री हैं । उद्धव ठाकरे , ठाकरे परिवार के पहले शख्स हैं जिन्होंने सरकार की कमान अपने हाथों में ली। अब तक ठाकरे परिवार अपने रिमोट से सरकार सरकार चलाते आये है। उद्धव के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना किसी शतरंज के खेल से कम नहीं था। उनके राजनीतिक मार्ग पर ऐसी कई अड़चने आई जो कि उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने से रोकते थे।
जब वो अपने जिंदगी के शुरुवाती चरण में थे, तब किसी को इस बात की संभावना भी नहीं थी कि  उद्धव ठाकरे राजनीति में आएंगे।  पर उद्धव ठाकरे ने सबको यह दिखा दिया कि राजनीति में भले ही वो नए हो, पर वो लंबी रेस के खिलाड़ी हैं ।
उद्धव ठाकरे का जन्म 27 जुलाई 1960 को दादर में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा दादर के बाल मोहन विद्या मंदिर स्कूल में हुई। उद्धव ठाकरे के 2 बच्चे है। बड़े बेटे का नाम आदित्य ठाकरे और छोटे तेजस ठाकरे है। ऊध्दव के अलावा उनके बेटे आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर हैं। महाराष्ट्र के पर्यावरण एवं पर्यटन मंत्री और पालक मंत्री की भूमिका निभा रहे है।  उद्धव के स्कूल के दोस्तों का कहना है कि उद्धव क्रिकेट के बेहतरीन खिलाड़ी है। उन्हें बचपन से क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है।

हालांकि धीरे धीरे उनकी रुचि फोटोग्राफी में बढ़ने लगी। कॉलेज के दिनों में उद्धव कई सारे फोटो खिंच कर लाते और बालासाहेब को दिखाते। अपने इसी पैशन के चलते उन्होंने सर जमशेदजी जीजीभाई स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई विश्वविद्यालय से 17 साल की उम्र में ही उद्धव ठाकरे ने फोटोग्राफी में माहिर बनने के लिए डिप्लोमा हासिल किया। कॉलेज के दिनों में ही वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पर उनके कई एग्जिबिशन हुए हैं, लेकिन फोटोग्राफर उध्दव ने राजनीति की तरफ रूख कर लिया और 40 वर्ष से लगातार लोगों के बीच हैं ।इसकी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।

ठाकरे परिवार की तीनों पीढ़ी के शौक एक दम अलग है। बालासाहेब ठाकरे बेजोड़ कार्टूनिस्ट थे , तो उद्धव को बेमिसाल फोटोग्राफी हैं। वहीं बालासाहेब ठाकरे के पोते और उध्दव ठाकरे के बड़े बेटे आदित्य को बेहतरीन कला प्रेमी हैं । आदित्य ठाकरे की कई कविताएँ हिंदी और मराठी में छप चुकी है। उनके द्वारा लिखा गया सॉन्ग अल्बम ‘उम्मीद’ भी लॉन्च हो चुका है। भले ही परिवार की 3 पीढ़ी के शौक अलग है पर तीनों का राजनीति में लगाव समान रहा है। जिस तरह बालासाहेब के बाद उद्धव शिवसेना की कुर्सी संभाल रहे है। उसी तरह आदित्य ठाकरे भी राजनीति के गलियारों में काफी चर्चे में रहते है।

आज से 30 साल पहले उद्धव का भीड़ और भाषण से कोई संबंध नहीं था। उद्धव भीड़ में भाषण देने से भी कतराते थे। पर आज हालात काफी बदल गए है। उद्धव का कहना है कि राजनीति की दांवपेंच उन्होंने उनके पिता से सीखे हैं।।

1990 में उद्धव पहली बार पब्लिक मीटिंग में शामिल हुए थे। 2002 में बालासाहेब ठाकरे जब उद्धव को बीएमसी चुनाव की कमान सौंपी। तो उस समय उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना ने बीएमसी चुनाव शानदार प्रदर्शन किया।  उन्होंने 2002 के बीएमसी चुनाव में पार्टी की जीत के साथ शिवसेना को एक अहम मुकाम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। तब उनके पिता ने उन्हें पार्टी में एक जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए जोर डाला।
वर्ष 2003 में  उद्धव ठाकरे को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किये गए ।
बतौर कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ने एक मुहिम की शुरुवात की “मी मुंबईकर”। जिसमें बाला साहेब के साथ ही संजय खान और जावेद अख्तर जैसे बड़े लोग भी शामिल हुए थे। यह मुहिम मुंबईकरों को आपस में जोड़ने की कोशिश थी। उद्धव में एक ही नहीं कई गुण है। उद्धव एक अच्छे लेखक भी है। उद्धव ठाकरे; महाराष्ट्र देशा और पहावा विट्ठल पुस्तकों के लेखक भी हैं.
विदर्भ, महाराष्ट्र के किसानों के लिए इन्होंने एक ऋण राहत अभियान का आयोजन किया था। जिसमें किसानों को 2 लाख तक का कर्ज माफ कर दिया जाता है।

2012 में बालासाहेब की मृत्यु, शिवसेना के साथ ही पूरे महाराष्ट्र के लिए बेहद ही दुखद समाचार था। हालांकि उस ससय शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव थे। पर बिना बालासाहेब ठाकरे के उनके लिए यह एक चुनौती भरा समय था। बड़ी जिम्मेदारी थी कि वे शिवसेना को किस तरह कामयाबी के शिखर पर ले जाये लाए। उद्धव भले ही शांत स्वभाव के हैं पर वे जानते हैं भाषणबाजी , चर्चा और हो हल्ले से दूर कब कौन सा दांव खेलना है। कब चुप बैठना है, यह उन्हें अच्छी तरह से पता था। 4 साल पहले बीएमसी का महापौर बनाते समय ही उद्धव ने कह दिया था कि महाराष्ट्र में अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा। ठीक 3 साल बाद 2019 में विधानसभा की चुनाव होने के बाद मुख्यमंत्री की लड़ाई शुरू हुई। भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती थे तो शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। ये दोनों की लड़ाई इतनी बढी कि शिवसेना ने भाजपा के साथ अपना 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया और काँग्रेस, एनसीपी का हाथ थाम लिया। और दावे के मुताबिक ऊध्दव ने शिवसेना का मुख्यमंत्री बना दिया। वह शिवसैनिक कोई और नहीं बल्कि उद्धव बाल ठाकरे है। उद्धव ठाकरे जितना बोलते है उतना करके दिखाते है। 4 साल पहले बोले थे शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा और शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाकर दिखाया।

उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कोरोना काल में अहम भूमिका निभाई। दुनिया के 10 मुल्कों से ज्यादा कोरोना के केस सिर्फ महाराष्ट्र में आए है। ऐसे में इतनी गम्भीर परिस्थिति में भी उद्धव ने वह कर दिखाया जिसकी लोगों को उम्मीद थी।
उन्होंने मुंबई में धारावी मॉडल और मुंबई मॉडल मुहिम की शुरुवात की। जिससे एशिया का सबसे बड़ा स्लम धारावी हाल ही में कोरोना मुक्त हो गया है और अभी धारावी में कोरोना का खात्मा हो चुका है । इस धारावी मॉडल की तारीफ WHO ने भी की थी। मुंबई मॉडल के कारण महाराष्ट्र में तकलीफ के इस दौर में शिवसेना लोगों की तकलीफ कैसे दूर करेगी। अगले साल आनेवाले बीएमसी चुनाव में शिवसेना अपनी तकलीफ दूर कर पाती है या अपने कामों के कारण एक बार फिर जनता का विश्वास जीत पाती है। यह देखना दिलचस्प होगा

Reported By – Sakashi Sharma

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