‘सामना’ के माध्यम से शिवसेना ने भाजपा को लॉकडाउन को लेकर जमकर सुनाई खरी-खोटी

महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोरोना (Corona) के बढ़ते मामलों से राज्य सरकार बेहद चिंतित है। इसी वजह से महाराष्ट्र (Maharashtra) की महाविकास आघाडी सरकार सम्पूर्ण लॉकडाउन (Lockdown) लगाने का विचार कर रही है। खबरों की माने तो, उद्धव सरकार इसी हफ्ते मंत्री मंडल की बैठक के बाद लॉकडाउन (Lockdown) को लेकर फैसला ले सकती है। इसी बीच आज शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लॉकडाउन (Lockdown) की वकालत करते हूए भाजपा को जमकर खरी-खोटी सुनाई है।

‘सामना’ में छिपे एडिटोरियल में लिखा है कि, ‘कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन (Lockdown) के सिवाय और कोई विकल्प नहीं बचा है। पीएम मोदी ने देश को लॉकडाउन और नोटबंदी आदि विषयों से अवगत कराया था।

लेख में आगे लिखा है कि, ‘भ्रष्टाचार की चेन तोड़ने के लिए नोटबंदी और लॉकडाउन की चेन को तोड़ने की मंशा से मोदी सरकार ने पिछले साल देशभर में लॉकडाउन लगाया था। तब भाजपा नेताओं ने पीएम मोदी के लॉकडाउन के फैसले का थाली बजाकर स्वागत किया था।

इसके अलावा सामना में लिखा है कि आज कोरोना की स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर है। इसका भान महाराष्ट्र के विपक्षी दलों ने रखा तो, जनता पर मेहरबानी होगी। महाराष्ट्र में शनिवार को 59 हजार से ज्यादा कोरोना के नए मरीज मिले हैं। जबकि राज्यभर में 309 लोगों की मौत हुई है। महाराष्ट्र में मुम्बई, पुणे, ठाणे और नाशिक जैसे जिले कोरोना के हॉटस्पॉट बन गए हैं। देश में कोरोना के आंकड़ें डेढ़ लाख को पार कर चुका है। यह दृश्य झकझोरने वाला है।

वहीं ‘सामना’ में लिखा गया है कि, ‘इस संकट को राजनीति से परे होकर देखना चाहिए। महाराष्ट्र में भाजपा का सीएम नहीं है, तो इसकी कीमत प्रदेश की जनता क्यों चुकाए? वहीं पड़ोसी प्रदेश गुजरात में भाजपा की सत्ता होने के बावजूद कोरोना की स्थिति नियंत्रण में आ गई, ऐसा नहीं है। बल्कि सूरत, अहमदाबाद में कोरोना के मरीज सड़क और फुटपाथ पर गिरने लगे हैं। इस हदतक गुजरात में स्तिति अनियंत्रित हो गई है।

इन विकट परिस्थितियों में भी गुजरात के सीएम विजय रुपाणी लॉकडाउन लगाने को तैयार नहीं है। क्योंकि व्यापारियों का नुकसान होगा। व्यापारियों की पार्टी सिर्फ व्यापारियों के बारे में विचार करते रहेगी तो, कोरोना का संकट दिनों ओ दिन और बढ़ते जाएगा।

‘सामना’ में लिखा है कि महाराष्ट्र में आईसीयू, वेंटिलेटर और बेड की कमी हो रही है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ 117 बेड बचे हैं। नांदेड़ जिले के देगलूर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रावसाहब अंतपुरकर की कोरोना की वजह से मौत हो गई।

शिवसेना की नासिक से नगरसेविका कल्पना पांडे की कोरोना के चलते निधन हो गया। आरएसएस प्रमुख मोहनराव भागवत भी कोरोना वायरस का शिकार हो गए और जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोरोना से आम जनता बेहाल है।

‘सामना’ में आगे लिखा है कि व्यापार, मंदिर, राजनीति, मंदिर-मस्जिद जहां हैं, वहीं रहेंगे परंतु इंसान ही नहीं बचेगा तो क्या करोगे? दुनिया में इंसान के अलावा और किसी चीज का मोल नहीं है। न ईश्वर, न पैसा, न धर्म और न राजनीति। इसी वजह से कोरोना संकेट पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, यही बेहतर होगा। महाराष्ट्र में वैक्सीन की कमी है, परंतु पडोसी राज्य गुजरात में वैक्सीन की बाढ़ है।

कोरोना के समय में केवल महाराष्ट्र की नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है। इसको सबको कबूल करना होगा। परंतु केंद्र सरकार द्वारा कुछ राज्यों के साथ किये जाने वाले वाला सौतेला व्यवहार उससे भी ज्यादा गंभीर है।

Report By : Rajesh Soni

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